नज़्म 3 📝

1. उस पतंग की बादशाहत भी क्या होगी... जो एक डोर के भरोसे आसमाँ से बग़ावत करती हैं... 2. लगता है लेहरों से सीखी है उसने मोहब्बत... जो लौट के तो आती है मगर ठहरती नहीं... 3. लौट के फ़िर आया हैं एक अरसे के बाद... वहीं रास्ता, वहीं मकान, और वहीं बचपन... 4. अधूरे... Continue Reading →

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