आज ना बाज़ार में घूमते हुए…उसी पुरानी दुकान के बाहर…एक फेरी वाले के पास…मुझे एक झुमका दिखा…हूबहू जो तुझे चाइये था…तब नहीं ख़रीद पाया था ना…जेब ख़ाली ख़ाली जो रहता था…मग़र आज तो मैंने ख़रीद ही लिया उसे…बिना कुछ सोचे समझे…पूछने पर पता लगा कि…क़ीमत ज़्यादा नहीं थी उसकी…या शायद अब उतना फर्क़ नहीं पड़ता…ले... Continue Reading →
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