ज़िन्दगी का मोल…

शोहरत भरी थी ज़िंदगी में…फ़िर क्यूँ ख़ामोशी का पहरा था…दुनिया को जीत रहा था जो…फ़िर क्यूँ वो शख़्स अकेला था… आसान नहीं होता मुस्कुराते रहना…ग़र दिल में ग़म बेहिसाब हो…आसान नहीं होता सुकून से सोना…ग़र दिल में ख्वाहिशें हज़ार हो… जो देता रहा सीख जीने की…फ़िर क्यूँ वो जीने से घबरा गया…करके सौदा मौत से... Continue Reading →

वक़्त लगता हैं…

वक़्त लगता हैं... उसे स्वीकारने में...जो मनचाहा नहीं मिलता...वक़्त लगता हैं... उसे अपनाने में...जो कुछ ख़ास नहीं लगता...वक़्त लगता हैं... उसे निभाने में...जो कभी पास नहीं रहता...वक़्त लगता हैं... उसे जानने में...जो कभी साथ नहीं रहता...वक़्त लगता हैं कभी कभी... जीने में भी...और जीने की चाहत को समझने में भी...ठोकरों से गिरकर उठने में भी...... Continue Reading →

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