ज़िन्दगी का मोल…

शोहरत भरी थी ज़िंदगी में…
फ़िर क्यूँ ख़ामोशी का पहरा था…
दुनिया को जीत रहा था जो…
फ़िर क्यूँ वो शख़्स अकेला था…

आसान नहीं होता मुस्कुराते रहना…
ग़र दिल में ग़म बेहिसाब हो…
आसान नहीं होता सुकून से सोना…
ग़र दिल में ख्वाहिशें हज़ार हो…

जो देता रहा सीख जीने की…
फ़िर क्यूँ वो जीने से घबरा गया…
करके सौदा मौत से वो…
फ़िर ज़िन्दगी का मोल सीखा गया…
~तरुण

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