ये शायरों की दास्तां…

ये शायरों की दास्तां भी कितनी अज़ीब होती हैं… कहीं दर्द से भरी… तो कहीं इश्क़ की कमी होती हैं…बेरोज़गार ही होते हैं वो अक्सर…शायद इसलिए बयां अपने ज़ख्मों को कर…रंगमंच पर खुलेआम ही बिक जाते हैं… कभी दिल की कहते हैं… तो कभी दिल में ही रखते हैं…जो जितना समझता हैं उसे उतना ही... Continue Reading →

वो नया बसंत बनकर लौट आया हैं…

वो नया बसंत बनकर लौट आया हैं...चलो कोई तो हैं जो कहीं से तो लौटा हैं...बहुत सी अर्जियां करी थी... शायद उस तक ही पहुँच पायी...और वो लौट आया... हमारे पास... उससे पहले कहाँ था... नहीं मालूम... कहीं तो रहेगा ही... उसकी अपनी दुनिया रही होगी... मग़र अब वो हमारी दुनिया का एक हिस्सा बन... Continue Reading →

काफ़ी हैं इतना…

काफ़ी हैं इतना…कि अगर तू किसी को ज़ुदा होते हुए देखें और…तुझे अपनी कहानी याद आ जाए…काफ़ी हैं इतना…कि तू कोशिश भी करें कि वो…वो गलतियाँ ना करें जो हमने की थी कभी…काफ़ी हैं इतना…तू कभी उस मोड़ से भी गुज़रे…और चंद लम्हों के लिए ही सही…तू अगर उस रास्ते को देखने की कोशिश करें…जहा... Continue Reading →

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