वहीं मोड़ पर…

तुझे पता हैं...आज भी उसी मोड़ पर... दोबारा आकर ठहर गया हूँ मैं...एक अरसा हुआ हैं शायद...ना जाने कितने मौसम गुज़रें....ना जाने कितने सावन बरसे...कितनी धूप... कितनी धूल... और ना जाने कितने ही लोग... गुज़रें होंगे यहीं से... अब तक... फ़िर भी उस एक पल... उस एक लम्हें में... कहीं अटका हुआ हूँ मैं अब... Continue Reading →

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