दीवारें…

कभी कभी सोचता हूँ...कि वो दीवारें...कितना कुछ जानती हैं ना...मेरे बारे में...कई अर्से से वहीँ हैं...अब तो मैली भी हो गई हैं...थोड़ी सी मग़र...देखा हैं उन्होंने मुझे...मेरे असल चेहरे को...मेरे मन में उठी लेहरों को...वो जानती हैं बहुत कुछ...जो शायद कभी कहा नहीं जाएगा...और कभी लिखा भी नहीं जाएगा...फ़िर भी साथ हैं वो मेरे...हर वक़्त...... Continue Reading →

अब तलक…

बादलों में भरे हुए पानी का... बारिश बनकर ज़मीं पर उतरना...लगे जैसे ज़मीं की कोई गहरी प्यास हैं... जो अब तलक बुझी नहीं... या फ़िर ज़मीन का कोई एक हिस्सा... जो अब बादल बन गया हैं... अब तलक कोशिशों में हैं कहीं... फ़िर से मिल जाए उसी ज़मीं से... बादल बनकर ना सही... बारिश बनकर... Continue Reading →

राम!!!

राम!!! सिर्फ़ एक नाम नहीं… एक दर्पण हैं… जो ज़िंदगी दिखा सकता हैं…एक चरित्र हैं… जो जिया जा सकता हैं…एक संघर्ष हैं… जो जीता जा सकता हैं… एक घूंट हैं… जो प्यास बुझा सके…एक सबक हैं… जो जीना सीखा सके…एक हिस्सा हैं… जो सब के जीवन में हो सके…एक जीवन हैं… जो सबका हिस्सा हो... Continue Reading →

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