तू धूप हो जाना…

कभी कभी बारिश से मिलने…धूप भी आ ही जाया करती हैं…कुछ कुछ बूँदों में छनती हैं…तो कुछ आसमाँ में बिखरती हैं…और एक रंगीन धनुष बनाती हैं… तुम भी वहीं धूप हो जाना…चाहें कितनी बारिशें हो…कभी तो तुम भी आ जाना…एक पल के लिए ही सही…मिलना और बिखर जाना…रंगीन ना सही…एक हसीन सी मुलाकात दे जाना…~तरुण

इत्तेफ़ाक…

ग़र कभी इत्तेफ़ाक से...मैं, तुम्हें बाज़ार में दिख जाऊ...हाँ उसी बाज़ार में...तो कहो, तुम मिलने आओगे...? अगर तुम्हारा ज़वाब ना हैं ना...तो मैं मान लूँगा...कि तुम बंदिशों में हो...और तुम अब वो नहीं हो...जो तुम थी कभी... अगर फिर भी तुम्हारा ज़वाब ना हैं ना...तो मैं मान लूँगा...कि कुछ हैं जो तुम्हें रोक रहा हैं...कुछ... Continue Reading →

बचपन…

सवेरे-सवेरे हाथों में झोला लिए...कुछ-कुछ ढूंढता हैं वो बचपन...रास्तों पर भटकते नंगे पाँव लिए... सपनों को पूरा करता हैं वो बचपन... एक छोर से तैरता हुआ... कभी काग़ज़ की नाव में वो बचपन...कभी बारिश से भरे पोखरों में... बेपरवाह उछलता वो बचपन...कभी संदूको में ढूंढता...अपना खोया हुआ वो बचपन...कभी पतंगों सा उड़ता...बेहिसाब वो बचपन...कभी पापा... Continue Reading →

फ़लसफ़ा…

कभी सोचा हैं... उस एक लम्हें...उस एक पल... उस एक क्षण में...जब पेड़ के पत्ते को... ये मालूम हो जाता हैं...कि उसका टूटना... अब बस तय ही हैं...फ़िर भी वो... उम्मीद तो करता ही होगा ना... कि अलग ना हो... और टूटे भी ना...उसको भी कोई थाम लें... कस के पकड़ लें... पर कोई नहीं... Continue Reading →

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