कशमकश…

इंतज़ार सबका एक जैसा नहीं होता…उनको भी था एक वक़्त तक…हमको भी था कुछ वक़्त तक…शायद थोड़ा सा तो आजतक भी हैं…मग़र अब किसी के लौट आने का नहीं हैं…ना ही किसी से मिलने का मन भर हैं…. अब इंतज़ार हैं एक उम्मीद का... अब वक़्त आगे निकल गया हैं…और साथ साथ हम भी कहीं... Continue Reading →

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