पहली बारिश…

क्यूँ पहली बारिश के दरमियाँ…तेरी थोड़ी याद सी आई…क्यूँ इन साँसों के दरमियाँ…भीनी भीनी आह सी आई…कुछ पहला सा इश्क़ था…बिखरा हुआ इन बूँदों में…क्यूँ भीगते हुए ज़हन में…तेरी कहानी फ़िर दोहराई…क्यूँ पहली बारिश के दरमियाँ…तेरी थोड़ी याद सी आई…एक घूंट भर चाय की प्याली से…मैंने अपनी प्यास बुझाई…दूजे घूंट तक आते आते…तेरी एक तस्वीर... Continue Reading →

मुलाकात…

उगते हुए सूरज की रोशनी में…एक नयी ज़िंदगी ढूंढता हूँ…पत्तों पर पड़ी औंस की बूँदों से…उनका हाल पूछता हूँ…रास्तों पर भटकते हुए फूल के…खिलने का इंतज़ार करता हूँ…कोई मिल जाए अजनबी तो उससे…बेहिसाब बातें करता हूँ…टकरा जाऊ ग़र सर्द हवाओं से तो…उनका ठिकाना पूछता हूँ…बादल में ग़र छुपी हूयी हो बारिश…तो बरसने को कहता हूँ…ईधर... Continue Reading →

वो झुमका…

आज ना बाज़ार में घूमते हुए…उसी पुरानी दुकान के बाहर…एक फेरी वाले के पास…मुझे एक झुमका दिखा…हूबहू जो तुझे चाइये था…तब नहीं ख़रीद पाया था ना…जेब ख़ाली ख़ाली जो रहता था…मग़र आज तो मैंने ख़रीद ही लिया उसे…बिना कुछ सोचे समझे…पूछने पर पता लगा कि…क़ीमत ज़्यादा नहीं थी उसकी…या शायद अब उतना फर्क़ नहीं पड़ता…ले... Continue Reading →

Start a Blog at WordPress.com.

Up ↑