दौर…

ये जो घुला हैं ज़हर हवाओं में…उसे साँसों में ना उतरने देना…तुम बस अपने दिल की…धड़कनों को सुनते रहना… चाहें जैसे भी हो हालात यहां के…तुम बस थोड़ा सा हौसला रखना…ग़र कभी टकरा भी जाओ मौत से…तुम बस अपनी ज़िन्दगी के लिए लड़ना… यूँ ही साँसे गंवाकर क्या ही पाना हैं…जो भी हो पास बस... Continue Reading →

जिद्द…

तारीफों में उनकी...कुछ नज़्में लिख रखी हैं... दुआओं में उनकी... मन्नतें भी कर रखी हैं...मग़र ये लोग कहते हैं... कि नहीं आएगें वो लौट कर... तुमने फिजूल ही... इतनी मेहनत कर रखी हैं... हमने भी कह दिया लोगो से... आना तो होगा ही उनको... अब जो भी हो...हमने भी उनके इंतज़ार की... जिद्द कर रखी... Continue Reading →

परिंदे की कहानी…

एक परिंदा शाम होते होते...एक दहलीज़ पर आकर रूक गया...कुछ ना पाया आसमाँ में शायद...फ़िर ज़मीं पर लौट गया... वहाँ उसने एक पिंजरें को देखा...पिंजरें में एक परिंदे को देखा...परिंदे को दाना चुगते देखा...फ़िर उसने आसमाँ को देखा... फ़िर उसने एक फ़ैसला लिया...पिंजरें के पास जाने का...भूख का मारा था वो शायद...वही एक चारा था... Continue Reading →

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