बारिश और मैं…

एक आह सी निकल जाती हैं...जब बारिशें मुझे बुलाती हैं...भीगने को... झूमने को...हर बार की तरह... मग़र इस बार तेरे बग़ैर...फ़िर भी जाता हूँ मैं...उस बारिश में...भीगने को...झूमने को...ताकि इस बारिश को... यूं ना लगे कि...हम साथ नहीं हैं...वो पूछती हैं...जब देखती हैं तू नहीं हैं साथ...वो बस आ ही रही हैं...बस थोड़ी देर के... Continue Reading →

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