बनारस की सुबह…

बनारस की सुबह… कुछ कुछ मैली सी…तो कुछ धुँधली सी…गंगा की तरह…कुछ कुछ भीगी सी… अस्सी में जल रहीं… कोई धूप हो जैसे…घाट पर ठहरी हुयी… कोई नाव हो जैसे… पंछियों ने छेड़ा हो…कोई राग हो जैसे…किनारे पे बहती हूयी…कोई राख हो जैसे… आसमाँ में गूँजता हो…कोई नाद हो जैसे…इंसानों में रमता हो… कोई भगवान... Continue Reading →

तेरे नाम…

लिपट कर तेरे लिहाफ़ से…मैं ये हिसाब कर लू…जो हिस्से में था मेरे…वो तेरे नाम कर दु… उम्र भर के लिए…तुझे एक मुक़ाम दे दू…जो कह ना सका कभी…वो सरेआम कह दू… ये नहीं पता था कभी…ऐसा इम्तहान भी देना होगा…इस एक ज़िन्दगी में हमें…अलग रहकर ही जीना होगा… होगी ग़र वो दुनिया कहीं…जहा रोशन... Continue Reading →

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