राम!!!

राम!!! सिर्फ़ एक नाम नहीं…

एक दर्पण हैं… जो ज़िंदगी दिखा सकता हैं…
एक चरित्र हैं… जो जिया जा सकता हैं…
एक संघर्ष हैं… जो जीता जा सकता हैं…

एक घूंट हैं… जो प्यास बुझा सके…
एक सबक हैं… जो जीना सीखा सके…
एक हिस्सा हैं… जो सब के जीवन में हो सके…
एक जीवन हैं… जो सबका हिस्सा हो सके…

राम!!! सिर्फ़ एक नाम नहीं…

थोड़ा रेत सा नर्म हैं…
थोड़ा माँ सा मर्म हैं…
थोड़ा धूप सा गर्म हैं…

थोड़ा सरल सा भी… और थोड़ा तरल सा भी हैं…
किनारे तक ले आए वो एक लहर सा भी हैं…

राम!!! जो रग रग में बसा हो…
राम!!! जहा भगवा रंग चढ़ा हो…
राम!!! जहा बजरंग रमा हो…
राम!!! जहा सत्संग मिला हो…

राम!!! सिर्फ़ एक नाम नहीं…
~तरुण

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