सवाल…

समझ नहीं आ रहा कि...इश्क़ करु या इश्क़ चुनू मैं...जिसको जाना नहीं अब तक...उसके संग कैसे रहूं मैं...ये ख्याल सोच के ही एक ख्याल में हूँ...कैसी रहेगी जिंदगी इस सवाल में हूँ...अब कुछ भी नहीं रहा हैं बाकी...मग़र ये फ़ैसला तो करना हैं...दो राहों पर खड़ा ज़रूर हूँ...मग़र मुसाफ़िर तो बनना हैं...अब तू ही बस... Continue Reading →

लिबास…

लिखकर ख़्वाब को एक चिट्टी में...उनके लिबास में छुपाया हैं...जो कुछ भी कहना था उनसे...सब उसी ख़त में समाया हैं...अब इन्तजार रहेगा उनका...उस लिबास में आने का...लिखा हुआ हैं जो ख़त में...उसे संग साथ संजोने का...फ़िर एक दिन उनको देखा...उसी लिबास को पहने हुए...वो पास से गुज़रे जैसे...और हम थे पूरे सहमे हुए...एक टूक भी... Continue Reading →

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