बचपन…

सवेरे-सवेरे हाथों में झोला लिए...कुछ-कुछ ढूंढता हैं वो बचपन...रास्तों पर भटकते नंगे पाँव लिए... सपनों को पूरा करता हैं वो बचपन... एक छोर से तैरता हुआ... कभी काग़ज़ की नाव में वो बचपन...कभी बारिश से भरे पोखरों में... बेपरवाह उछलता वो बचपन...कभी संदूको में ढूंढता...अपना खोया हुआ वो बचपन...कभी पतंगों सा उड़ता...बेहिसाब वो बचपन...कभी पापा... Continue Reading →

फ़लसफ़ा…

कभी सोचा हैं... उस एक लम्हें...उस एक पल... उस एक क्षण में...जब पेड़ के पत्ते को... ये मालूम हो जाता हैं...कि उसका टूटना... अब बस तय ही हैं...फ़िर भी वो... उम्मीद तो करता ही होगा ना... कि अलग ना हो... और टूटे भी ना...उसको भी कोई थाम लें... कस के पकड़ लें... पर कोई नहीं... Continue Reading →

वक़्त लगता हैं…

वक़्त लगता हैं... उसे स्वीकारने में...जो मनचाहा नहीं मिलता...वक़्त लगता हैं... उसे अपनाने में...जो कुछ ख़ास नहीं लगता...वक़्त लगता हैं... उसे निभाने में...जो कभी पास नहीं रहता...वक़्त लगता हैं... उसे जानने में...जो कभी साथ नहीं रहता...वक़्त लगता हैं कभी कभी... जीने में भी...और जीने की चाहत को समझने में भी...ठोकरों से गिरकर उठने में भी...... Continue Reading →

बनारस की सुबह…

बनारस की सुबह… कुछ कुछ मैली सी…तो कुछ धुँधली सी…गंगा की तरह…कुछ कुछ भीगी सी… अस्सी में जल रहीं… कोई धूप हो जैसे…घाट पर ठहरी हुयी… कोई नाव हो जैसे… पंछियों ने छेड़ा हो…कोई राग हो जैसे…किनारे पे बहती हूयी…कोई राख हो जैसे… आसमाँ में गूँजता हो…कोई नाद हो जैसे…इंसानों में रमता हो… कोई भगवान... Continue Reading →

तेरे नाम…

लिपट कर तेरे लिहाफ़ से…मैं ये हिसाब कर लू…जो हिस्से में था मेरे…वो तेरे नाम कर दु… उम्र भर के लिए…तुझे एक मुक़ाम दे दू…जो कह ना सका कभी…वो सरेआम कह दू… ये नहीं पता था कभी…ऐसा इम्तहान भी देना होगा…इस एक ज़िन्दगी में हमें…अलग रहकर ही जीना होगा… होगी ग़र वो दुनिया कहीं…जहा रोशन... Continue Reading →

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