ये शायरों की दास्तां…

ये शायरों की दास्तां भी कितनी अज़ीब होती हैं… कहीं दर्द से भरी… तो कहीं इश्क़ की कमी होती हैं…बेरोज़गार ही होते हैं वो अक्सर…शायद इसलिए बयां अपने ज़ख्मों को कर…रंगमंच पर खुलेआम ही बिक जाते हैं… कभी दिल की कहते हैं… तो कभी दिल में ही रखते हैं…जो जितना समझता हैं उसे उतना ही... Continue Reading →

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