आज फ़िर तुझे एक ख़त लिख रहा हूँ…
आज फ़िर तुझे एक ख़त लिख रहा हूँ...किसी उम्मीद से नहीं... बस यूँही लिख रहा हूँ...कहते हैं नया साल आया हैं...तो नयी कलम से नये पन्ने पर...नये एहसास को लिये ये ख़त लिख रहा हूँ...मालूम तो हैं ही मुझे... तू ठीक ठाक होगी...फ़िर भी शुरू करने के लिए तेरा हाल पूछ रहा हूँ...ठीक हुँ मैं... Continue Reading →
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