फ़िर से…

फ़िर से अगर इश्क़ होगा तुझे…तो फ़िर क़यामत भी आएगी…फ़िर से तेरी नींद भी उड़ेगी…फ़िर बेचैन रात भी आएगी…सुबह सुबह किसी दिन…फ़िर चाय ठंडी पड़ जाएगी…और यूँही करते करते एक दिन तुझे…उसकी आदत हो जाएगी…फ़िर से अगर इश्क़ होगा तुझे…तो फ़िर क़यामत भी आएगी…~तरुण

वो कृष्ण हैं…

ये कृष्ण का सागर हैं राधा... तुम यूँ ही खेल ना पाओगी...जब भी उतरोगी प्रेम से इसमें... तुम कभी डूब ना पाओगी... ये कृष्ण का सागर हैं राधा... जितना गहरा जाओगी... उतना ही समझ भी पाओगी... ग़र मिला दे वो अपना हाथ कभी... तुम इस जग को भी भूल जाओगी... ये कृष्ण का सागर हैं... Continue Reading →

बगिया…

कुछ धुँधला सा तो भी याद हैं क्या तुझे…मुझे तो सब कुछ याद हैं…वैसा का वैसा ही…वो गंगा किनारे किसी घाट से होते हुए…बनारस की तंग गलियों से गुज़रते हुए…मंदिरों की चौखटो को पार करके…एक छोटी सी बगिया हुआ करती थी…जहा की छांव में अक्सर…तू और मैं मिला करते थे…ज्यादा तो कुछ था नहीं वहां…बस... Continue Reading →

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