जीवन का मोल…
एक बादल था कुछ घना सा...अँधियारा करके चल दिया...बरसा भी वो इतनी ज़ोर से कि...परिन्दों को बेघर कर दिया...भीगा था मैं भी... उसी अँधियारे में...सारी सारी रात उसी की बारिश में...लगता था अब कोई ना आएगा...जीवन अब अँधेरों में घुल जाएगा...मग़र एक मुक़ाम पर आकर वो फीका होने लगा...जो था उसके अंदर वो अब खाली... Continue Reading →
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