ज़िंदगी का सफ़र…

अनबन हुयी कुछ बादलों से...तो बरस गई ये बारिशें...वो अपने घर में धूप लाने...उलझ गया यूँ सूरज से...फ़िर देख रात में चाँद को...उसने वहीँ पैंतरा आज़माया...घूरते घूरते चाँद को एक टूक...वो सुर्ख़ लाल ही कर पाया...फ़िर पड़ी उसकी हठी नज़रे... अनगिनत सितारों पर...टूटते देख उनमें से एक को... फ़िर उसको ये सवाल आया...क्या हैं यहां... Continue Reading →

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