समंदर…

समंदर को भी कभी... अपनी महफ़िल में शरीक होने दो... वो खारा भी हैं और गहरा भी हैं... एक जाम पिलाकर कभी... उसको भी तो बहकने दो... एक घूंट लेहरों संग लेकर कभी... खुद को भी किनारे पर झूमने दो... चंद लफ़्ज़ों की शिकायत से ही सही... कभी तो उस चाँद को भी रूठने दो...... Continue Reading →

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