ठोकर…
जिंदगी का सबक भी ठोकरों से ही मिलता हैं...दिल पे घाव भी अपना ही तो देता हैं...अक्सर सही और ग़लत की जंग में...कभी कभी कोई इंसान टूट जाता हैं...किसी को तक़दीर से खूब मिलता हैं...तो कोई अपनी तक़दीर ख़ुद लिखता हैं...फ़िर क्यूँ इंसान, इंसान को तराजू में तौलता हैं...कहते हैं करम का लेखा-जोखा होता हैं... Continue Reading →
फ़िर वहीँ निशाँ…
मैं फ़िर लौट आया हूँ...तेरे ही साहिल पर...एक बरस के बाद...होगी गुफ़्तगू थोड़ी सी...आज तो तेरे साथ...निशाँ छोड़े थे कुछ मैंने...मिटा दिए हैं जो तूने... अपनी लहरों के साथ...मैं फ़िर छोड़ जाऊंगा...तेरे लिए वहीं एक काम...तू मिटाते रहना फ़िर से...अपनी लहरों के साथ...मैं बनाता रहूँगा...जब भी लौट कर आऊंगा... अपनी लकीरों से... फ़िर वहीँ निशाँ...~तरुण
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