माँ…
माँ, मुझे इतना ज़रूर मालूम हैं कि...मेरी कहानी को लिखा तुने हैं...एक नेक शुरुआत के साथ...मग़र इसका अंत कहा होगा ये नहीं मालूम...और शायद तुझे भी नहीं मालूम होगा ना...अगर होगा भी तो, तू बताएगी थोड़ी ना...माँ जो हैं तू... अंत से बढ़कर अनंत तक... माँ, इस घर में तुम हो, पापा हैं, बहने भी... Continue Reading →
वक़्त के पन्नों से…
ये वक़्त के पन्ने भी बहुत अज़ीब होते हैं...ना तो ये फ़िर से खुल सकते हैं...ना ही इनको बदल सकते हैं...फ़िर भी, जो आने वाला हैं...वो ख़्यालों में आ ही जाता हैं...और जो गुज़र गया हैं... वो ज़ेहन में रह ही जाता हैं...हैं ना, वक़्त के पन्ने... कुछ अज़ीब से...कोई यादों की मीठी बर्फ़ी बनाता... Continue Reading →
पंख की कलम से…
परिंदे के परों से...टूट कर वो ज़मीं पर गिर गयी...लगी हाथ जब इंसानों के...तो एक कलम बन गयी... नब्ज़ में अपनी, स्याही भरकर...वो काग़ज़ पर उतर गयी...इंसान के ख़्यालों का वो...एक ज़रिया सा बन गयी... कहानियाँ...नज़्में और किस्से...बेपरवाह लिखती गयी...लगा उसको फ़िर से, जैसे...एक नयी ज़िंदगी मिल गयी... कश्मकश भी कुछ ऐसी थी...उस पंख के... Continue Reading →
Recent Comments