जिंदगी का सबक भी ठोकरों से ही मिलता हैं...दिल पे घाव भी अपना ही तो देता हैं...अक्सर सही और ग़लत की जंग में...कभी कभी कोई इंसान टूट जाता हैं...किसी को तक़दीर से खूब मिलता हैं...तो कोई अपनी तक़दीर ख़ुद लिखता हैं...फ़िर क्यूँ इंसान, इंसान को तराजू में तौलता हैं...कहते हैं करम का लेखा-जोखा होता हैं... Continue Reading →
आज फ़िर तुझे एक ख़त लिख रहा हूँ…
आज फ़िर तुझे एक ख़त लिख रहा हूँ...किसी उम्मीद से नहीं... बस यूँही लिख रहा हूँ...कहते हैं नया साल आया हैं...तो नयी कलम से नये पन्ने पर...नये एहसास को लिये ये ख़त लिख रहा हूँ...मालूम तो हैं ही मुझे... तू ठीक ठाक होगी...फ़िर भी शुरू करने के लिए तेरा हाल पूछ रहा हूँ...ठीक हुँ मैं... Continue Reading →
कशमकश…
इंतज़ार सबका एक जैसा नहीं होता…उनको भी था एक वक़्त तक…हमको भी था कुछ वक़्त तक…शायद थोड़ा सा तो आजतक भी हैं…मग़र अब किसी के लौट आने का नहीं हैं…ना ही किसी से मिलने का मन भर हैं…. अब इंतज़ार हैं एक उम्मीद का... अब वक़्त आगे निकल गया हैं…और साथ साथ हम भी कहीं... Continue Reading →
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