क्या ही होता जहाँ में…
क्या ही होता जहाँ में अगर तू ना होता...ना मैं आवारा बादल होता... ना यूँ बेमौसम बरसता... ना किसी अनजाने से मोड़ पर... यूँ ही तेरी राहें तकता... क्या ही होता जहाँ में अगर तू ना होता... ना इस बंजारेपन से इश्क़ होता... ना ही बावरा ये मेरा मन होता... ना ही हवाओं में कोई... Continue Reading →
जीवन का मोल…
एक बादल था कुछ घना सा...अँधियारा करके चल दिया...बरसा भी वो इतनी ज़ोर से कि...परिन्दों को बेघर कर दिया...भीगा था मैं भी... उसी अँधियारे में...सारी सारी रात उसी की बारिश में...लगता था अब कोई ना आएगा...जीवन अब अँधेरों में घुल जाएगा...मग़र एक मुक़ाम पर आकर वो फीका होने लगा...जो था उसके अंदर वो अब खाली... Continue Reading →
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