दीवारें…

कभी कभी सोचता हूँ...कि वो दीवारें...कितना कुछ जानती हैं ना...मेरे बारे में...कई अर्से से वहीँ हैं...अब तो मैली भी हो गई हैं...थोड़ी सी मग़र...देखा हैं उन्होंने मुझे...मेरे असल चेहरे को...मेरे मन में उठी लेहरों को...वो जानती हैं बहुत कुछ...जो शायद कभी कहा नहीं जाएगा...और कभी लिखा भी नहीं जाएगा...फ़िर भी साथ हैं वो मेरे...हर वक़्त...... Continue Reading →

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