अब तलक…

बादलों में भरे हुए पानी का... बारिश बनकर ज़मीं पर उतरना...लगे जैसे ज़मीं की कोई गहरी प्यास हैं... जो अब तलक बुझी नहीं... या फ़िर ज़मीन का कोई एक हिस्सा... जो अब बादल बन गया हैं... अब तलक कोशिशों में हैं कहीं... फ़िर से मिल जाए उसी ज़मीं से... बादल बनकर ना सही... बारिश बनकर... Continue Reading →

फ़लसफ़ा…

कभी सोचा हैं... उस एक लम्हें...उस एक पल... उस एक क्षण में...जब पेड़ के पत्ते को... ये मालूम हो जाता हैं...कि उसका टूटना... अब बस तय ही हैं...फ़िर भी वो... उम्मीद तो करता ही होगा ना... कि अलग ना हो... और टूटे भी ना...उसको भी कोई थाम लें... कस के पकड़ लें... पर कोई नहीं... Continue Reading →

माँ…

माँ, मुझे इतना ज़रूर मालूम हैं कि...मेरी कहानी को लिखा तुने हैं...एक नेक शुरुआत के साथ...मग़र इसका अंत कहा होगा ये नहीं मालूम...और शायद तुझे भी नहीं मालूम होगा ना...अगर होगा भी तो, तू बताएगी थोड़ी ना...माँ जो हैं तू... अंत से बढ़कर अनंत तक... माँ, इस घर में तुम हो, पापा हैं, बहने भी... Continue Reading →

वक़्त के पन्नों से…

ये वक़्त के पन्ने भी बहुत अज़ीब होते हैं...ना तो ये फ़िर से खुल सकते हैं...ना ही इनको बदल सकते हैं...फ़िर भी, जो आने वाला हैं...वो ख़्यालों में आ ही जाता हैं...और जो गुज़र गया हैं... वो ज़ेहन में रह ही जाता हैं...हैं ना, वक़्त के पन्ने... कुछ अज़ीब से...कोई यादों की मीठी बर्फ़ी बनाता... Continue Reading →

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