कच्ची उम्र…
माना कच्चे थे वो सारे वादे...और कच्ची थी वो उम्र.... निभाते तो तब भी थे... और निभाएंगे अब भी हम... सोच के भी यही सोचा... कि अब कह दे उनसे हम... जब गए यही बात करने...उनके घर पर हम...फ़ासले इतने ज़्यादा थे...जितनी नहीं थी उम्र... बदल गयी थी सूरत उनकी...बस न बदले थे हम...कहने की... Continue Reading →
Recent Comments