नज़्म 3 📝

1. उस पतंग की बादशाहत भी क्या होगी... जो एक डोर के भरोसे आसमाँ से बग़ावत करती हैं... 2. लगता है लेहरों से सीखी है उसने मोहब्बत... जो लौट के तो आती है मगर ठहरती नहीं... 3. लौट के फ़िर आया हैं एक अरसे के बाद... वहीं रास्ता, वहीं मकान, और वहीं बचपन... 4. अधूरे... Continue Reading →

नज़्म २ 📝

#Poetry #Hindi #SpillPoetry #Shayarana #tarunsays #heartsays 1. मैं लिखूंगा तेरे बारे में... मक़सद प्यार पाना नहीं... समझाना हैं... 2. तुझसे मुलाक़ात का ज़िक्र ही काफ़ी था... तुने रूबरू होकर सारे अरमान पुरे कर दिए... 3. जिस भीड़ से छीन के लाया था तुझे कभी... आज उसी भीड़ में खड़े होकर तुझे देखा हैं... 4. कुछ... Continue Reading →

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