वो नया बसंत बनकर लौट आया हैं…

वो नया बसंत बनकर लौट आया हैं...चलो कोई तो हैं जो कहीं से तो लौटा हैं...बहुत सी अर्जियां करी थी... शायद उस तक ही पहुँच पायी...और वो लौट आया... हमारे पास... उससे पहले कहाँ था... नहीं मालूम... कहीं तो रहेगा ही... उसकी अपनी दुनिया रही होगी... मग़र अब वो हमारी दुनिया का एक हिस्सा बन... Continue Reading →

इत्तेफ़ाक…

ग़र कभी इत्तेफ़ाक से...मैं, तुम्हें बाज़ार में दिख जाऊ...हाँ उसी बाज़ार में...तो कहो, तुम मिलने आओगे...? अगर तुम्हारा ज़वाब ना हैं ना...तो मैं मान लूँगा...कि तुम बंदिशों में हो...और तुम अब वो नहीं हो...जो तुम थी कभी... अगर फिर भी तुम्हारा ज़वाब ना हैं ना...तो मैं मान लूँगा...कि कुछ हैं जो तुम्हें रोक रहा हैं...कुछ... Continue Reading →

तेरे नाम…

लिपट कर तेरे लिहाफ़ से…मैं ये हिसाब कर लू…जो हिस्से में था मेरे…वो तेरे नाम कर दु… उम्र भर के लिए…तुझे एक मुक़ाम दे दू…जो कह ना सका कभी…वो सरेआम कह दू… ये नहीं पता था कभी…ऐसा इम्तहान भी देना होगा…इस एक ज़िन्दगी में हमें…अलग रहकर ही जीना होगा… होगी ग़र वो दुनिया कहीं…जहा रोशन... Continue Reading →

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