दौर…

ये जो घुला हैं ज़हर हवाओं में…
उसे साँसों में ना उतरने देना…
तुम बस अपने दिल की…
धड़कनों को सुनते रहना…

चाहें जैसे भी हो हालात यहां के…
तुम बस थोड़ा सा हौसला रखना…
ग़र कभी टकरा भी जाओ मौत से…
तुम बस अपनी ज़िन्दगी के लिए लड़ना…

यूँ ही साँसे गंवाकर क्या ही पाना हैं…
जो भी हो पास बस वहीं दाव पर लगाना हैं…
क़ीमत आज यहा साँसों की हैं…
क़ीमत आज यहा अपनों की हैं…
हर कोशिश अब यही रहनी चाहिए…
दिल में ज़िंदा एक अगन होनी चाहिए…

ये भी एक ऐसा दौर हैं…
जो शुरू हुआ हैं तो अंत भी होगा…
बस थोड़ा सा सब्र रखना…
इसमें थोड़ा वक़्त लगेगा…
मग़र इतना ज़रूर ख़्याल रखना…
कि हर ज़िन्दगी की मौत तो होती हैं…
फ़िर भी ये ज़िन्दगी हमेशा रहती हैं…
~तरुण

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